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इस बार के गणतंत्र दिवस परेड अवधि 120 मिनट से घटा कर 92 मिनट कर दी गयी है.

गणतंत्र दिवस के इतिहास में पहली बार एक बड़ा फेर बदल करते हुए सीमा सुरक्षा बल का ऊंट दस्ता इस साल की परेड में हिस्सा नहीं मिलेगा. हर वर्ष 54 सदस्यों का ऊंट दस्ता परेड का हिस्सा होते थे. जिन्हे रेगिस्तान का जहाज दस्ता भी कहा जाता है. रक्षा मंत्रालय में सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय परेड की अवधि को 120 मिनट से घटा कर 92 मिनट का करने पर लिया गया है.

इसके साथ कुछ और भी बदलाव किया गया गया जैसे कि  इस बार की गणतंत्र दिवस के परेड में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल के दस्ते परेड का हिस्सा नहीं होंगे. साथ ही स्कूली छात्र और झांकियां भी परेड का हिस्सा न होकर लाल किले पर एक विशेष तीन दिवसीय रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी.

राजपथ पर एक साथ होंगी मिसाइल परेड
समय कम कि वजह से कंपोजिट दस्ते परेड का भाग बनेंगे यानी टैंक और बख्तरबंद गाड़िया (बीएमपी) के दस्ते एक साथ होंगे और अलग-अलग मिसाइलें भी एक साथ ही राजपथ पर होंगी.

पहली बार दिखेगा फ्रांसीसी सेना की परेड
इस बार के गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार फ्रांस की सेना का एक दस्ता और एक फ्रांसीसी सेना का बैंड परेड में भाग लेंगे. सीमा सुरक्षा बल के ऊंटों की जगह सेना के टोही कुत्ते परेड में पहली बार शामिल किया गया है. 29 जनवरी को पहली बार बीटिंग रिट्रीट में भी तबला और सितार को भारतीय वाद्य यंत्रों के रूप में परेड का हिस्सा बनाया जा रहा है. इससे पहले ज्यादातर ब्रिटिश आर्मी की धुनें बजायी जाती थीं.

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इस बार के गणतंत्र दिवस परेड अवधि 120 मिनट से घटा कर 92 मिनट कर दी गयी है. गणतंत्र दिवस के इतिहास में पहली बार एक बड़ा फेर बदल करते हुए सीमा सुरक्षा बल का ऊंट दस्ता इस साल की परेड में हिस्सा नहीं मिलेगा. हर वर्ष 54 सदस्यों का...